रखना

जितना मन करे उतने तुम सवाल रखना
मन में छुपाके कोई न मलाल रखना

मुझे तमीज़ नहीं है मदद मांगने की
मेरी मायूसी में मेरा खयाल रखना

मैं अक्सर रोने लग जाता हूं बेवजह
दिल में सबर रखना हाथ में रुमाल रखना

रखो न रखो और कुछ यादों में मगर
आंखों की हसी क़दमों के उछाल रखना

तुम बेहतर ही उभरे हो हर दफ़ा ‘मिसरा’
अपने माज़ी को ही अपना मिसाल रखना

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