मुद्दतों बाद फिर से सामने खड़ा कर दिया
क्या खाईश है ख़ुदा का जो ये हादसा कर दिया
एक दूजे के आंसुओं के इंतेज़ार में थे क़ैद
बारिश ने रहम की और हमें रिहा कर दिया
कुछ फ़ुज़ूल सी बातें करने लगे हम दोनों
इन महीनों में ये हुआ फलाना कर दिया
बार बार वो पूछती रही कि सब ठीक है न
उसे डर था जुदाई ने दीवाना कर दिया
मुझे खुशी थी कम-से-कम वो खुश दिख रही है
तो गुस्से की आग को ही मैंने स्वाहा कर दिया
मैंने चेहरे पे बड़ी सी मुस्कान रखके उसे
एक नैपकिन का ग़ुलाब देके रवाना कर दिया
फिर उतनी ही तक़लीफ़ हुई रूह-ओ-दिल में ‘मिसरा’
हमने दोबारा एक दूजे को मना कर दिया