क़िस्मत

किस्मतवालों में भी बदकिस्मत उसे कहा जाता है
जिसने पान डाला होता है कोई चाय ले आता है

काले संगेमरमर वालों की परेशानियां और हैं
घर आया रिश्तेदार उनपे काली नज़र लगाता है

किसीको हैरत नहीं कि चंदू की चाची भाग गयीं
चंदू का चाचा तो बस चांदनी रात में पास आता है

भगवान की मूरत बिठाने वाले को ये वहम है कि
वो बड़ा भक्त है उससे जो बस इक तस्वीर लगाता है

और भी दिन आएंगे ऐसे जब लिखना यूं मुश्किल होगा
शायर वही होता है जो तब भी मिसरा लिख पाता है


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Comments

One response to “क़िस्मत”

  1. […] Translated from my Hindi poem, क़िस्मत […]

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