कभी खून तो कभी ये पेसाब मांगता है
ये डॉक्टर तो पूरा ही हिसाब मांगता है
एक भी पन्ने की पढ़ाई नहीं हूँ मैं
पर मांगता है तो पूरी किताब मांगता है
लौटाएगा तो बस दो ही आँख की रोशनी
मगर बदले में पूरा आफ़ताब मांगता है
दो-चार बोतल गुलकोज़ क्या चढ़ा दिए
दाम में गंगा क्या झेलम चेनाब मांगता है
क्यों हर इंसान मेरे जैसा नहीं ‘मिसरा’
जो दवा के बदले बस शराब मांगता है
So, what did you think about this?